टाइम ट्रेवल

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Chapter – 5

2023, मुम्बई (हॉस्पिटल)
सनिम एक बेड पर लेटी होती है, अचानक से उसकी आँखें खुलती है। उसके सामने डॉक्टर और रिया खड़े होते है।
रिया (सनिम को गले लगाते हुए) -“सनिम तुम्हें होश आ गया, हम सब कब से इंतजार कर रहे थे, तुम ठिक हो ना”।
सनिम हाँ में सर हिलाती है-“वो गुंडे, क्या हुआ उनका शायद मैंने तुम्हारे फोन में विडिओ भेजी थी ना, और मै यहाँ कैसे आयी”?
रिया-“तुम हमें दो दिन बाद जंगल के नीचे वाले हिस्से में मिली तब तक तो तुम्हारे पापा ने सब कुछ सर पर उठा लिया था और विराज को भी खुब लतारा और वो गुंडे अब जेल में है पुरा ड्रग्स रेकेट के पिछे पुलिस लग गयी”।
सनिम-“ओ, रिया मुझे अभी किसी से नही मिलना दस मिनट मुझे अकेला छोड़ दो”।
रिया-“अच्छा ठिक है”।
सनिम खिड़की कि तरफ देख कर कुछ सोचने लगती है और फिर सो जाती है।

1973, बॉम्बे (हॉस्पिटल)
क्रिया की आँख खुलती है, उसके पास उसका बेटा बैठा बैठा सो रहा होता है और दुसरी तरफ उसका पति था…।
क्रिया दोनों के सर पर हाथ फेरते हुए, उठो दोनों।
अजय-” मम्मी आप उठ गये”।
शिव -“क्रिया तुम ठिक हो,मै डॉक्टर को लाता हूँ”।
क्रिया-“मै ठिक हूँ,वो लोगों का क्या हुआ”?
शिव-“उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया है”।
क्रिया हाँ,मे सर हिलाते हुए दोनों का हाथ पकड़ लेती है।

1913, बम्बई (एक कमरा)
अभय को भी होश आता है, उसके लोग भी खुश हो जाते है।
अभय-“हथियार का क्या हुआ “?
मदन-” भैया चिंता मत करिये वो हमारे पास सुरक्षित है”।
अभय-“हम्म, एक और बात अब हमारे दल में स्त्रियां भी शामिल हो सकती है”।

2083, मुंबई
आरुश को होश आता है,उसके सामने उसकी माँ होती है।
आरुश की माँ-“बेबी तुम ठिक हो”?
आरुश-“हाँ”
आरुश की माँ-“आई एम सॉरी बेटा मुझे तुम्हारी बात सुननी चाहिए थी, मुझे नहीं पता था की तुम इतने डिप्रेस्ड हो की…..”
आरुश रोते होते हुए-“मॉम,आई एम सॉरी मुझे ये नहीं करना चाहिए था”।
फिर वो अपनी माँ के गले लग जाता है।