वर्ल्ड वेटलैंड्स डे, वेटलैंड्स बंजर भूमि नहीं प्राकृतिक संपदा है

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World Wetlands Day

दो फरवरी को विश्व वेटलैंड दिवस (World Wetlands Day) मनाया जाता है, लेकिन यह पहला मौका है जब विश्व वेटलैंड दिवस संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसका पूरा श्रेय बीते अगस्त महासभा में पारित एक प्रस्ताव को जाता है।जब पूरी दुनिया ने इस तथ्य के महत्वता को समझा कि वेटलैंड (Wetlands) बंजरभूमि नहीं हैं।
विश्‍व वेटलैंड दिवस (World Wetlands Day) की शुरुआत कब हुई

विश्व वेटलैंड दिवस की शुरुआत कैस्पियन सागर के तट पर बसे ईरान के एक छोटे पर्यटन शहर रामसर से हुई। इसी शहर में सन् 1971 में एक अंतरराष्ट्रीय संधि के रूप में वेटलैंड समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे।उसके बाद ही सन् 1997 से 2 फरवरी को विश्व वेटलैंड दिवस मनाया जाने लगा। इसकी शुरुआत ईरान के रामसर से हुई। इसीलिए वेटलैंड (Wetlands) की एक मुख्य सूची का नाम इस शहर के नाम पर रामसर सूची में रखा गया है। इसमें अंतरराष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड के नाम दर्ज हैं। वैश्विक नजरिए से, रामसर सूची में शामिल वेटलैंड का कुल क्षेत्रफल 2.5 करोड़ वर्ग किलोमीटर है, जो भारत के भूभाग से थोड़ा ही कम है।बता दे कि, इन क्षेत्रों में निरंतर वर्षा होती है। भूजल पूरे वर्ष लगभग भूतल स्तर पर होता है, इसलिए इन क्षेत्रों में जलीय पौधों का अधिक विकास होता है। पौधों और पशुओं की एक समृद्ध शृंखला से भरे आर्द्र भूखंडों की जैवविविधता अन्य सभी पारिस्थितिक तंत्रों की जैवविविधता से अधिक समृद्ध है। और यही विशेषता इन्हें खास बनाती है।

वेटलैंड की भूमिका महत्वपूर्ण होती है

पारिस्तिथिक तंत्र सेवाओं में जल शोधन, भूजल पनुर्भरण, आंधी से बचाव, बाढ़ नियंत्रण आदि मुख्य हैं। यह बात अब सही सिद्ध हो चली है कि जलवायु परिवर्तन को कम करने और पर्यावरण को स्वस्थ और शुद्ध बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण योगदान है। जैसा की इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि ईरान के रामसर सूची में प्रवेश के सबसे पहले मानकों में ही वेटलैंड के प्रतिनिधि, दुर्लभ अथवा विशिष्ट प्रकारों के स्थलों को स्थान दिया गया है, और अन्य आठ मानकों में जैविक विविधता का संरक्षण करने वाले अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थलों को दर्ज किया गया है। इन मानकों में स्थायी जैवविविधता के समझौते के महत्व पर बल दिया गया है। रामसर सूची, जिस पर समस्त विश्व की निगरानी है, में शामिल होने के लिए इन मानदंडों के कारगर ढंग से प्रबंधन और उनकी पारिस्थितिक विशेषता को बनाए रखने का दायित्व भी आवश्यक है।

शहरों में रहने वाले हम ज्यादातर लोग वेटलैंड पर विशेष ध्यान नहीं देते। इसलिए कि वे बहुत दूर होते हैं – और बहुत उपयोगी या फिर एक अर्थ में किसी बड़े जलाशय की तरह सुंदर भी नहीं होते। रामसर सूची में शामिल लगभग पांच ऐसे क्षेत्र हैं।जहां वाहन द्वारा नई दिल्ली से दो घंटों के अंदर पहुंचा जा सकता है। भारत का हैदरपुर वेटलैंड इस सूची में शामिल होने वाला अब तक का अंतिम और 47वां वेटलैंड है। एक तरह से यह मानवीय प्रयास का एक फल है । हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य की सीमाओं पर स्थित, यह विविधतापूर्ण पर्यावास हजारों पक्षियों और जलपाखियों, रेंगनेवाले जलजीवों और मछलियों को जीवन देता है। जिनमें से कुछ लुप्तप्राय जीवों की सूचियों में शामिल हैं। कुछ अन्य आर्द्र भूखंडों की तरह, यह भी जाड़े में आने वाले हमारे प्रवासी पक्षियों का एक पसंदीदा स्थल है।

दुनिया भर में वनों की होने वाली कमी को लेकर लोगों ने चिंता व्यक्त करने के साथ-साथ इस पर गंभीरता से ध्यान दिया है। इस बात पर आम जनमानस का ध्यान अभी तक नहीं गया है कि हम वनों की तुलना में तिगुनी गति से वेटलैंड खो रहे हैं। वेटलैंड निश्चय ही महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र हैं, और हमारे जीवन पर अलग-अलग रूपों में प्रभाव डालते हैं।

वेटलैंड्स(Wetlands) बंजरभूमि नहीं

विश्व वेटलैंड दिवस (World Wetlands Day) वेटलैंड्स के अति महत्वपूर्ण परितंत्रों के हमारे ज्ञान पर विचार करने का एक आदर्श दिन है। जहा समस्त विश्व इस तथ्य को जान चुका है कि, वेटलैंड्स बंजरभूमि नहीं है।