नवरात्र की सप्तमी तिथि को नवदुर्गा के क्रम में कालरात्रि (Kalratri) देवी के दर्शन की मान्यता है। वाराणसी में इनका मंदिर चौक इलाके के कालिका गली में स्थित है। माना जाता है माता के चरणों में गुड़हल के पुष्प की माला, लाल चुनरी, नारियल, फल, मिष्ठान, सिन्दूर, रोली, और द्रव्य अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है।
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की प्रतिदिन पूजा होती है, जिसमें चैत्र मास की नवरात्रि की सप्तमी दिवस के अवसर पर मां कालरात्रि (Kalratri) की पूजा की जाती है। सप्तमी के दिवस पर मां कालरात्रि (Kalratri) की पूजा करने से परिवार के सभी दुख बाधाएं पूरी तरह से दूर हो जाती है। मां कालरात्रि उनकी सभी मनोकामना पूर्ण करती है। जिसके लिए भक्त पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ माता के मंदिर पहुंचकर मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना कर भोग लगाते है।
नवरात्रि के सप्तमी में देखने को मिला की मंदिर में चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ मंदिर के पुजारी ही औपचारिकतावस मंदिर में पूजन पाठ और माता कालरात्रि देवी की आरती करते नजर आए। पुजारियों की मानें तो उन्होंने अपने जीवन में कभी ऐसा नजारा नहीं देखा था।