आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगीं। इससे पहले एक आईएएनएस-सीवोटर (IANS -Cvoter) राष्ट्रव्यापी ट्रैकर पोल में कुछ अनुमानित परिणाम सामने आए हैं। सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार, 6,25,000 रुपये की वार्षिक आय पूरी तरह से आयकर ब्रैकेट से पूरी तरह से बाहर हो जानी चाहिए। यह औसत मासिक आय 52,000 रुपये से अधिक है।
कुछ आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण( Nirmala Sitaraman)आयकरदाताओं के लिए बड़ी राहत देने की घोषणा कर सकती हैं।मध्यम वर्ग में अपेक्षित राहत में मूल छूट सीमा को ढाई( 2.5) लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये करना है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए इसे मौजूदा तीन लाख रुपये से बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये किए जाने की अनुमान लगाई जा रही है। शीर्ष आय स्लैब को भी मौजूदा 15 लाख रुपये से संशोधित किए जाने की संभावना है।
इनकम टैक्स ब्रैकेट में आता रहा बदलाव
दरअसल 2010 में जब यूपीए (UPA) सत्ता में था, और अभी तक घोटालों और लड़खड़ाती हुई अर्थव्यवस्था की चपेट में नहीं आया था,तब सर्वेक्षण के उत्तरदाताओं ने कहा था कि, वे 5,65,000 रुपये की वार्षिक आय या 47,260 रुपये की मासिक आय इनकम टैक्स ब्रैकेट (Income Tax Bracket) से बाहर चाहते हैं। यह बीते तेरह साल की अवधि में करदाताओं की उम्मीदों में बहुत तेज वृद्धि की तरह प्रतीत नहीं होता है, लेकिन अलग-अलग वर्षों में समय – समय पर बदलाव आया है।
जबकि साल 2020 में सर्वेक्षण के आयकरदाता चाहते थे, कि 3,80,000 रुपये की वार्षिक आय या 31,717 रुपये की मासिक आय आयकर दायरे से बाहर हो। इसके बाद भारत कोविड – 19 के दूसरे संक्रमण की चपेट में आ गया था। इसके अनुसार करदाताओं की अपेक्षाओं में एक बदलाव आया था।
साल 2021 के सर्वेक्षण के दौरान, आयकरदाता चाहते थे कि 5,60,000 रुपये की वार्षिक आय आयकर दायरे से बाहर हो। 2022 तक यह बढ़कर 6,25,000 रुपये प्रति वर्ष हो गया है। जब 1 फरवरी, 2022 को बजट पेश किया जाएगा तो विश्लेषकों को व्यापक रूप से कर मुक्त आय की सीमा में बढ़ोतरी की उम्मीद है। वे महामारी के कारण चिकित्सा व्यय छूट में पर्याप्त वृद्धि की भी उम्मीद कर रहे हैं।