त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के विधानसभा चुनावों (Assembly-Election) का एलान आज हो सकता है। इन तीनों राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल मार्च में खत्म हो रहा है। 2018 की तरह इस बार भी तीनों राज्यों में विधानसभा चुनाव एक चरण में हो सकता है। तीनों ही राज्यों में 60-60 सदस्यीय विधानसभा है।
इन तीन राज्यों का विधानसभा कार्यकाल मार्च में हो रहा समाप्त
नगालैंड विधानसभा का कार्यकाल 12 मार्च, मेघालय विधानसभा का 15 मार्च और त्रिपुरा विधानसभा का कार्यकाल 22 मार्च को समाप्त हो रहा है। वर्तमान समय में त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है| वहीं, नगालैंड में एनडीपीपी के नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री हैं। मेघालय में एनपीपी के कोनराड संगमा की सरकार है। इन दोनों राज्यों में भाजपा सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है।
दो चरण में इन तीनो राज्यों का हुआ था मतदान
2018 में त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड राज्यों के विधानसभा चुनाव (Assembly-Election) की तारीखों का एलान 18 जनवरी को हुआ था। तब इन तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव दो चरणों में संपन्न हुए थे। पहले चरण में 18 फरवरी को त्रिपुरा में वोटिंग हुई थी। वहीं, दूसरे चरण में 27 फरवरी को मेघालय और नगालैंड में मतदान हुए थे| दो चरणों में मतदान होने के बाद 3 मार्च 2018 को तीनों राज्यों के चुनाव के नतीजे आए थे।
2018 में बिप्लव देव राज्य मुख्यमंत्री बने थे
साल 2018 के इलेक्शन में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव (Assembly-Election) में भारतीय जनता पार्टी की जीत हुई थी| भारतीय जनता पार्टी ने यहां 25 साल से शासन कर रहे लेफ्ट को बेदखल किया था। जहा बिप्लब कुमार देब राज्य मुख्यमंत्री बने थे। साल 2022 में भारतीय जनता पार्टी ने बिप्लव कुमार देब की जगह माणिक साह को राज्य की कमान सौंपी। अब माणिक साह पर भाजपा को सत्ता में वापसी कराने की जिम्मेदारी होगी।
कुछ महीनों से त्रिपुरा में सियासी उथलपुथल जारी है
हालांकि, बीते कुछ महीनों से राज्य में सियासी उथलपुथल लगातार बना हुआ है| बजेपी नेता हंगशा कुमार त्रिपुरा इस साल अगस्त में अपने 6,000 आदिवासी समर्थकों के साथ टिपरा मोथा में शामिल हो गए। वहीं, आदिवासी अधिकार पार्टी भाजपा विरोधी राजनीतिक मोर्चा बनाने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही कई नेता पार्टियां बदल रहे हैं।
एनपीपी से इस्तीफा देकर दो विधायक बीजेपी का हाथ थामा

वही, दूसरी तरफ साल 2018 में मेघालय राज्य में नेशनल पीपुल्स पार्टी (National People’s Party) और भाजपा गठबंधन की सरकार बनी थी। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी।
हालांकि, बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई थी। चुनाव में अलग-अलग लडे़ नेशनल पीपुल्स पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने गठबंधन किया। एनपीपी के कोनराड संगमा मुख्यमंत्री बने। यहां भी चुनाव से पहले राजनीतिक उथल-पुथल जारी है।
यहां तक की गठबंधन सरकार चला रही एनपीपी और भाजपा के बीच भी दरारें दिख रही हैं। हालही में दो विधायक एनपीपी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। कहा जहा रहा है कि, साल 2018 की तरह ही इस बार भी दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे।
2018 के इलेक्शन में भाजपा और NDPP ने मिलकर चुनाव लड़ा था
साल 2018 नागालैंड के विधानसभा चुनाव (Assembly-Election) से पहले सत्ताधारी नगा पीपुल्स फ्रंट (Naga People’s Front) दो हिस्सों में बट गयी थी| बागियों ने नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी बनाई।
पार्टी के बड़े नेता और राज्य के मुख्यमंत्री रहे नेफ्यू रियो बागी गुट के साथ चले गए। चुनाव होने से पूर्व नगा पीपुल्स फ्रंट ने बजेपी से गठबंधन तोड़ लिया। भाजपा और NDPP ने मिलकर चुनाव लड़ा। NDPP को 18 तो भाजपा को 12 सीटों पर जीत मिली। गठबंधन सत्ता में आया और नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री बने।
नेफ्यू रियो के मुख्यमंत्री बनने के बाद 27 सीट जीतने वाली NPF के ज्यादातर विधायक NDPP में शामिल हो गए। इससे NDPP विधायकों का आंकड़ा 42 पर पहुंच गया। वहीं, NPF के केवल चार विधायक बचे। बाद में NPF ने भी सत्ताधारी गठबंधन को समर्थन दे दिया। मौजूदा समय में राज्य विधानसभा के सभी 60 विधायक सत्तापक्ष में हैं।