14 अगस्त 1947 को भारत का विभाजन एक ऐतिहासिक घटना थी, जिसने देश के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा। इस दिन भारत को दो नए देशों में विभाजित किया गया था। भारत और पाकिस्तान। जहाँ विभाजन के बाद दोनों देशों के बीच हिंसा और अशांति फैल गई, और लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए।
वही उल्हासनगर शहर का इतिहास भी विभाजन से जुड़ा है। इस शहर की स्थापना 1947 में उन लोगों द्वारा की गई थी जो पाकिस्तान से भारत आए थे। इन लोगों ने पाकिस्तान में अपने घर और लोगों को छोड़ दिया था और वे उल्हासनगर में एक नई शुरुआत करना चाहते थे।
उल्हासनगर शहर आज एक समृद्ध और विकसित शहर है। यहाँ विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग रहते हैं, और यहाँ शांति और समरसता का माहौल है। उल्हासनगर शहर के लोग विभाजन के दर्द को नहीं भूले हैं, लेकिन वे आगे बढ़ने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जहाँ हर साल 14 अगस्त को उल्हासनगर शहर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाता है। इस दिन लोग विभाजन के पीड़ितों को याद करते हैं, और वे शांति और समरसता के लिए संकल्प लेते हैं।
उल्हासनगर शहर एक ऐतिहासिक शहर है, जो विभाजन के दर्द को सहन कर चुका है, लेकिन इस शहर के लोगों ने हिंसा और अशांति के बावजूद एक बेहतर भविष्य बनाया है। उल्हासनगर शहर एक प्रेरणा की तरह है, जो यह दर्शाता है कि मनुष्य हर कठिनाई को किसी भी परिस्तिथि में पार कर सकता है।
बता दे की साल 1939 से लेकर 1945 के बीच उल्हासनगर शहर कल्याण कैंप था। यहां ब्रिटिश सेना का मिलिट्री कैंप हुआ करता था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यहां सिपाही रहते थे। जहाँ 1945 में विश्व युद्ध खत्म होने के बाद यहां से ब्रिटिश आर्मी चले गए। वही कैंप 2 साल तक बंद पड़ा रहा। उल्हासनगर नाम रखने से पहले इस शहर का नाम कल्याण कैंप था। उल्हासनगर शहर की स्थापना 8 अगस्त 1949 में हुई थी।