VARANSHI: वाराणसी के अस्सी स्थिति काशी सुमेरु पीठ आश्रम में शंकराचार्य स्वामी शंकरानन्द सरस्वती (Swami Shankaranand Saraswati) के निर्वाण दिवस का आयोजन किया गया। इस मौके पर विराट संत सम्मेलन में वाराणसी के अलग अलग मठों के संत और प्रमुख यहां शामिल हुए। इस मौके पर संत समाज की बैठक भी हुई। बैठक में शंकराचार्य (Swami Shankaranand Saraswati) की मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर विभिन्न संतो ने समाज में शंकराचार्य के विचारों को व्यक्त किया।
काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने इस मौके पर कहा कि हम सभी अपने महापुरुषों के दिखाये हुए मार्ग पर चलकर ही अपने जीवन को सफल कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के आयोजन उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ उनके द्वारा निश्चित किये गये मार्ग पर चलने के लिए संकल्पित होने के लिए ही आयोजित किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी शंकरानन्द सरस्वती (Swami Shankaranand Saraswati) के स्मृति में धर्म सभा और भव्य भंडारे का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि लगभग सैकड़ों की संख्या में संत समाज के लोग यहां मौजूद है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के स्मरण से नई चेतना मिलती है। स्वामी जी को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वह 3 बजे जाकर गंगा जी का स्नान करते थे। सनातन धर्म के विकास के लिए उन्होंने पूरे भारत में यात्रा निकाली थी। उन्होंने बताया कि वह 14 विद्याओं के परा विद्वान थे।
निर्वाण दिवस में आए हुए सभी साधु संतों ने सनातन धर्म को लेकर अपनी बातों को रखा। उन्होंने कहा है कि सनातन धर्म को एक होना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने स्वामी जी के बताए हुए रास्ते एवं उनकी कही हुई बातों को स्मरण करते हुए लोगों के बीच में साझा किया। राम नाम का कीर्तन साधु संतों द्वारा किया गया। आश्रम में आए हुए सभी साधु संतों के लिए भव्य भंडारे का आयोजन किया गया।
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