Supreme Court: सतलुज यमुना लिंक विवाद पर टली सुनवाई

20 साल पुराना पंजाब और हरियाणा के बीच सतलुज यमुना लिंक का वित्तीय वर्ष फिर से गरमा गया था|

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सुप्रीम कोर्ट अब 15 मार्च को हरियाणा और पंजाब के मध्य चल रहे (Sutlej-Yamuna-link) विवाद की सुनवाई करेगा| यह विवाद पानी बटवारे को लेकर हरियाणा और पंजाब के मध्य चल रहा है| अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी सुनवाई के लिए उपस्तिथ ना होने के कारण इस मामले की सुनवाई की तारीख बढ़ा दी गयी है|

अब यह सुनवाई 15 मार्च 2023 को होगी| हरियाणा ने न्यायालय को बताया कि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उपरांत दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के मध्य मीटिंग हो चुकी है, लेकिन इस बैठक के बाद भी कोई नतीजा सामने निकल कर नहीं आया है| अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ही करेगी और इसका हल निकालेगी|

केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया था

वित्तीय वर्ष 2022 के सितम्बर महीने में बीस वर्ष पुराना मुद्दा पंजाब और हरियाणा के मध्य सतलुज यमुना लिंक (Sutlej-Yamuna-link) का मामला फिर से उभर आया| केंद्र सरकार ने आरोप लगाया था कि, पंजाब सरकार इस मामले में सहयोग नहीं कर रही है| नए मुख्‍यमंत्री को भी लेटर लिखा गया, परन्तु उन्होने इसका जवाब नहीं दिया| इससे पहले भी केंद्र सरकार (central government) पंजाब के पहले के मुख्यमंत्रियों से बात करती रही, लेकिन इस मामले का कोई नतीजा नहीं निकला|

कोर्ट ने दोनों राज्यों को बातचीत कर समाधान निकालने को कहा था

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की देखरेख में हरियाणा के मुख्‍यमंत्री से मिलकर मतभेद और समाधान के लिए कोशिश करने को कहा था| जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने कहा था कि, प्राकृतिक संसाधनों को शेयर किया जाना चाहिए, विशेषकर पंजाब में सुरक्षा चिंताओं को मद्देनज़र रखते हुए सभी पार्टियों को इस मामले में सहयोग करना चाहिए|

अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट को कहा कि, केंद्र ने पहले भी पंजाब के मुख्‍यमंत्री को पत्र लिखा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला| अप्रैल 2022 में पंजाब के नए मुख्‍यमंत्री को एक पत्र लिखा गया था और उन्होंने अभी तक जवाब नहीं दिया है|

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों से केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक में बातचीत करके समाधान निकालने को कहा था|

जुलाई 2020 में भी सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री को निर्देश देते हुए कहा था कि वो आपस मे बातचीत करके यह बताए कि इस समस्या का हल निकाल सकते है या नहीं|

अदालत ने दोनों राज्यों को कानून व्यवस्था बनाये रखने का आदेश दिया था

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि, ये कोर्ट का आदेश है जिसका पालन देश के सभी नागरिकों को करना चाहिए| यदि केंद्र दोनों राज्यों से बातचीत करके हल निकालता तो अदातल इस मामले की सुनवाई जारी रखेगा|

अदालत ने साफ तौर पर कहा था कि, लिंक नहर का निर्माण करना ही होगा, उसमें कितना पानी आएगा ये बाद में तय किया जाएगा| अदालत ने हरियाणा और पंजाब को कानून व्यवस्था बनाए रखने के आदेश दिए थे|

कोर्ट ने कहा था कि, सतलुज यमुना लिंक को लेकर यथास्थिति कायम रखने के आदेश बरकरार रहेंगे| राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखने की रिस्पांसिबिलिटी दोनों स्टेट पर है|

2004 में बनाए गए कानून को असंवैधानिक करार दिया था

बता दे कि, साल 2016 में 10 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब द्वारा पड़ोसी राज्यों के साथ सतजुल यमुना लिंक (Sutlej-Yamuna-link) नहर समझौता निरस्त करने के लिए 2004 में बनाए गए कानून को असंवैधानिक करार दिया था|

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए रेफरेंस पर दिए फैसले में कहा था कि, वह राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए सभी रेफरेंस पर अपना नकारात्मक जवाब देते हैं| पंजाब सरकार करार रद्द करने के लिए एक तरफ का फैसला नहीं ले सकती|

कोर्ट ने कहा था कि, पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट 2004 सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, इंटर स्टेट नदी जल विवाद एक्ट और अन्य संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है| सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिकपीठ ने साफ किया था कि पंजाब अन्य राज्यों से किए गए एग्रीमेंट के बारे में एकतरफा फैसला नहीं ले सकती है|