सिद्धार्थनगर: संस्कृत विद्यालयों में कागजों में की जा रही भर्तियां

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Siddharthnagar

Siddharthnagar: उत्तर प्रदेश की सरकार शिक्षा व्यवस्था सुधारने में क्या कुछ नहीं कर रही है लेकिन धरातल पर शिक्षा व्यवस्था सुधरने का नाम नही ले रही।

पूरा मामला जनपद सिद्धार्थनगर (Siddharthnagar) के विकास खण्ड उसका बाजार के चौरी महुलानी का है, जहाँ श्री विंध्याचल आयुर्वेद संस्कृत माध्यमिक विद्यालय पूरी तरह से जर्जर पड़ा हुआ है। पूरी तरह से खंडहर में तबदील हो चुका है। जर्जर विद्यालय में पेड़ पौधे भी उग आए है, लेकिन अभी भी विद्यालय अभिलेखों में संचालित किया गया है। इतना ही नहीं इस विद्यालय पर प्रधानाचार्य और सहायक प्रधानाचार्य नयुक्त किए गए है। वही ग्रामीणों का कहना है कि यह विद्यालय जब से जर्जर हुआ तब से खुला नही है। वही प्रधानाचार्य आते है और सिर्फ दरवाजा खोलकर चले जाते है और न ही कोई विद्यार्थी विद्यालय में पढ़ने आता है। हद तो तब हो गई जब प्रधानाचार्य कैलाश नाथ मिश्रा ने मीडिया से बात चीत में 106 छात्र पंजीकृत करने की भी बात कही है।

जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि संविदा 2 वर्ष की ट्रेनिंग चल रही है और सफाई देते भी नजर आए और कहे कि मामले की जांच कराई जाएगी। वही जिला अधिकारी संजीव रंजन ने इस मामले पर बताया कि मामला संज्ञान में आया है और शासन की मंशा थी और विद्यालय की स्थित दयनीय है। वहाँ छात्र भी काफी कम है। मामले की जांचकर उचित करवाई की जायेगी।