इंसानी जिंदगी के लिए रोटी कपड़ा और मकान वह जरूरत है जिसके बिना इंसान का जीवन अधूरा है। हालांकि यह बात अलग है कि रोटी और कपड़ा थोड़ी सी मेहनत के बाद हासिल हो जाता है। मगर मकान को हासिल करने के लिए किसी भी शख्स का पूरा जीवन लग जाता है। जिसके चलते कुछ के घर बनाने के सपने पूरे होते हैं और वही ज्यादातर लोगों के यह ख्वाब अधूरे ही रह जाते है। ऐसे में रामपुर के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ कई परिवारों के लिए मसीहा साबित हो चुके हैं। क्योंकि उनके द्वारा अब तक जन सहयोग से 10 मकानों की नींव का भूमि पूजन किया जा चुका है और जिसके बाद जल्द ही उन परिवारों का पक्की छत पाने का सपना भी पूरा होने लगा है।
रामपुर के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने दिव्यांग जनों की मदद के बाद स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं में नियमों और कायदो की बंदिश के चलते फायदा ना पाने वाले मजबूर लोगों के लिए एक अलग ही रास्ता चुनने की ठानी। उनके द्वारा कुछ ऐसे मजबूर लोगों का चयन किया गया जो या तो शारीरिक रूप से अक्षम थे या फिर आर्थिक तौर पर कमजोर थे। जिनको दो वक्त की रोटी भी बमुश्किल मिल रही थी लेकिन उनका पक्की छत पाने का अरमान एक तरह से दूर की कौड़ी ही लग रहा था। फिर किसी तरह से लोगों की मजबूरी डीएम के सामने आई और फिर यहीं से शुरू हुआ प्रेरणा का वह सिलसिला जो एक के बाद एक अब तक 10 मकानों के बनाए जाने तक जारी है।
डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ अपने कार्यक्षेत्र में जिस तरह से ध्यान देते हैं उससे अलग वह एक बेहतर इंसान का परिचय देते हुए भी नजर आते हैं। यही कारण है कि अब तक 10 मजदूर परिवारों के सर पर पक्की छत देने के लिए उनके द्वारा जनपद के कई संपन्न व्यक्तियों से संपर्क स्थापित किया गया और फिर इस नई पहल की शुरुआत हुई। दिलचस्प बात यह है कि जब भी डीएम किसी मजबूर और बेसहारा परिवार को पक्का मकान बनवाने की पहल करते हैं तो वह मौके पर पहुंचने के बाद बाकायदा मंत्र जाप के साथ ही भूमि पूजन की प्रक्रिया में भी शामिल होते हैं।
डीएम की इन दिल छूने वाली तस्वीरों का हर कोई मुरीद हो गया है। ताजा तस्वीरें मिलक तहसील क्षेत्र के ग्राम सिलाईबढ़ा गांव की है जहां पर उनके द्वारा सड़क हादसे में शिकार हुए ज्ञान सिंह के घर पहुंच कर पहले तो पूरी विधि विधान के साथ मंत्र उच्चारण किया गया और फिर भूमि पूजन किया और उसके बाद नव निर्माण के लिए नींव रखी है। यह नजारा देखने के लिए गांव में लोगों की भीड़ जुटी रही इस बीच कहीं ना उस परिवार मे मौजूद ज्ञान सिंह और पत्नी गुरनाम कौर के चेहरे पर खुशी के भाव थे तो वही जुबान पर उनका मकान जल्द बन जाने को लेकर कुछ उम्मीद भरे शब्द भी थे।
नौजवान आईएएस अफसर रविंद्र कुमार मांदड़ ने अपनी कार्यशैली से साबित कर दिया है कि सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाए जाने में भले ही कितने भी नियम और कायदों को पूरा करने की शर्ते हों मगर अफसर अगर ठान ले तो मजबूर और बेसहारा लोगों की मदद लोगों के जन सहयोग से भी की जा सकती है। अब तक उनके द्वारा पक्के मकान को बनवाने को लेकर कार्य शुरू कर दिया गया है यही कारण है कि उनके इस जज्बे की चौतरफा सराहना की जा रही है।