नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली के मेट्रो यात्रियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा को सीधे दिल्ली मेट्रो से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके तहत नोएडा के सेक्टर 142 मेट्रो स्टेशन से बोटेनिकल गार्डन तक 11.56 किलोमीटर लंबा एक मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से नोएडा, ग्रेटर नोएडा समेत दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क एक्वा लाइन, ब्लू लाइन और मजेंटा लाइन आपस में जुड़ जाएंगे। इस मेट्रो कॉरिडोर को लेकर दिल्ली रेल मेट्रो कॉरपारेशन (DMRC) ने डिटेल्स प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) को सौंप दी है।
आपको बता दें कि नोएडा और दिल्ली मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों को अभी तक नोएडा के सेक्टर 51 और सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन से बदलाव करना पड़ता है। लेकिन बोटेनिक गार्डन से नोएडा के सेक्टर 142 तक मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण होने और मेट्रो का संचालन होने से मेट्रो यात्रियों को काफी सुविधा होगी।
बनाए जाएंगे कुल 8 स्टेशन
इस मेट्रो कॉरिडोर पर बोटेनिकल गार्डन, नोएडा सेक्टर-44, नोएडा ऑफिस, नोएडा सेक्टर-97, नोएडा सेक्टर-105, नोएडा सेक्टर-108, नोएडा सेक्टर-93, और पंचशील बालक इंटर कॉलेज स्टेशन बनाए जाएंगे। कॉरिडोर का आखिरी स्टेशन सेक्टर-142 होगा जो कि पहले ही बनकर तैयार है।
बोटेनिकल गार्डन एक्वा लाइन, ब्लू लाइन और मजेंटा लाइनों के लिए और बड़े इंटरचेंज स्टेशन के तौर पर काम करेगा। सबसे पहले यह ब्लू लाइन के एक स्टेशन के तौर पर तैयार किया गया था। इसके बाद यहां से मजेंटा लाइन जुड़ गई। इससे ओखला पक्षी अभ्यारण्य स्टेशन होते हुए दिल्ली की ओर कॉरिडोर तैयार किया गया। इसके साथ ही यह इंटरचेंज स्टेशन के तौर पर जाना जाने लगा। अब यहां से एक्वा लाइन विस्तार के कॉरिडोर को भी जोड़ने की योजना तैयार हो गई है। लिहाजा यहां से रिकॉर्ड यात्री अलग-अलग कॉरिडोर में जाने के लिए मेट्रो ले सकेंगे।
डीपीआर को सरकार से मंजूरी जरूरी
दिल्ली रेल मेट्रो कॉरपोरेशन की ओर से नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से मंजूरी के लिए डीपीआर भेजी जाएगी। यहां से मंजूरी के बाद इसे एनएमआरसी के बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड से मंजूरी के बाद इसे यूपी और केंद्र सरकार से मंजूर कराना होगा।
निर्माण में लगेंगे चार साल
एनएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक डीपीआर तैयार होने के बाद इसकी मंजूरी में करीब एक वर्ष का समय लगेगा। इसके बाद सबकुछ ठीक रहा तो कॉरिडोर निर्माण के लिए टेंडर निकाले जाएंगे। फिर एजेंसी चयन के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। इसमें करीब चार वर्ष लगेंगे। ऐसे में कॉरिडोर का काम पूरा होने तक करीब पांच वर्ष का समय लगेगा।
यह मेट्रो कॉरिडोर नोएडा से ग्रेटर नोएडा की ओर जाने के क्रम में बांयी ओर होगा। हालांकि एक्सप्रेसवे के दूसरे ओर के लोगों को सुविधा दिलाने के लिए फुटओवर ब्रिज आदि तैयार करने की योजना है। इसके माध्यम से दोनों ओर के रिहायशी, ऑफिस एरिया, स्कूल और कॉलेज जोड़े जाएंगे। इसकी मदद से आवागमन आसान करने की कोशिश होगी।