मोहम्मद शहाबुद्दीन बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति बने

स्पीकर शिरीन शर्मिन चौधरी ने बंगभवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में 73 वर्षीय मोहम्मद शहाबुद्दीन को शपथ दिलाई।

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पूर्व न्यायाधीश व वरिष्ठ राजनेता मोहम्मद शहाबुद्दीन (Mohammad Shahabuddin) ने बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। स्पीकर शिरीन शर्मिन चौधरी (Shireen Sharmin Chowdhary) ने बंगभवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में 73 वर्षीय मोहम्मद शहाबुद्दीन (Mohammad Shahabuddin) को शपथ दिलाई। राजकीय समारोह में प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) सहित उनके मंत्रिमंडल और नए राष्ट्रपति के परिवार के सदस्यों के अलावा, राजनेताओं, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारियों ने भाग लिया।

मोहम्मद शहाबुद्दीन ने राष्ट्रपति पद के लिए लिया शपथ

बता दें कि, मोहम्मद अब्दुल हामिद (Mohammad Abdul Hamid) का बतौर राष्ट्रपति का कार्यकाल रविवार को समाप्त हो गया था। शपथ ग्रहण समारोह के बाद मोहम्मद शहाबुद्दीन ने राष्ट्रपति पद के शपथ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। गौरतलब है, पूर्व न्यायाधीश मोहम्मद शहाबुद्दीन (Mohammad Shahabuddin) को बांग्लादेश का नया राष्ट्रपति फरवरी में चुन लिया गया था। मोहम्मद शहाबुद्दीन निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। बांग्लादेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त काजी हबीबुल अवल ने फरवरी में जमा किए गए उनके नामांकन पत्रों की जांच के बाद मोहम्मद शहाबुद्दीन के निर्विरोध राष्ट्रपति चुने जाने की घोषणा की थी।

कौन हैं मोहम्मद शहाबुद्दीन?

मोहम्मद शहाबुद्दीन (Mohammad Shahabuddin) का जन्म पश्चिमोत्तर पबना जिले में हुआ था। वे 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरुआत में अवामी लीग के छात्र और युवा विंग के नेता थे। शहाबुद्दीन ने 1971 के मुक्ति संग्राम में भी भाग लिया था और 15 अगस्त, 1975 को बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की उनके परिवार के सदस्यों के साथ एक सैन्य तख्तापलट में हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन करने के लिए उन्हें कैद भी किया गया था। उस तख्तापलट के कारण अवामी लीग सरकार भी गिर गई थी।

बाद में 1982 में वे देश की न्यायिक सेवा से जुड़े। बाद में जब साल 1996 के चुनावों में अवामी लीग वापस सत्ता में लौटी तो मोहम्मद शहाबुद्दीन ने बंगबंधु हत्याकांड की जांच दल के समन्वयक के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने राजनीति में पदार्पण किया। राजनीति में आने के बाद वे अवामी लीग सलाहकार परिषद के सदस्य बने। जहाँ अब वो देश के राष्ट्रपति बन गए है।