नाबालिग पहलवान (wrestler) ने WFI के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ लगाए यौन शोषण के आरोप वापस ले लिए हैं। उन्होंने कहा कि, बृजभूषण शरण सिंह ने मेरे साथ भेदभाव किया। नाबालिग पहलवान के पिता ने इसकी पुष्टि की है।
नाबालिग के पिता ने कहा कि, हमने 5 जून को सुप्रीम कोर्ट में बयान बदल दिए थे। मैंने किसी लोभ या लालच में नहीं, डर की वजह से बयान बदले। मैं ये नहीं कहना चाहता कि किसने धमकी दी है। मेरा भी परिवार है। अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरा परिवार बर्बाद हो जाएगा। मुझे डर लग रहा है। मेरा पूरा परिवार डिप्रेशन में है।
नाबालिग पहलवान (wrestler) के पिता ने कहा कि, मेरी बेटी का ट्रायल मैच था। उसमें दिल्ली की एथलीट और रेफरी और मैट चेयरमैन भी दिल्ली के थे। मेरी बेटी के साथ भेदभाव हुआ। मैंने वहां भी कहा कि कुश्ती करनी है तो कुश्ती करो। तब मेरी बेटी की रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन हुआ था, फिर भी उसने अपने हौसला बुलंद रखते हुए मैच खेला। उसके हौसलों पर उस रेफरी ने मिट्टी डाल दी। उसे 1 पॉइंट से कुश्ती हरा दी गई।
उन्होंने आगे कहा कि, मैं अपना मकान बेचकर बेटी को कुश्ती लड़वा रहा हूं, मुझे किसी का कोई सहारा नहीं है। मेरी बेटी ने कल रात भी खाना नहीं खाया, वह बहुत डिप्रेशन में है। पिछले 40 दिन से धरने पर साथ हूं। अब भी साथ हूं। पूरे मामले के बाद परिवार को ऐसी मानसिक स्थिति से गुजरना पड़ा, जिसे मैं ही समझ सकता हूं। मुझे परिवार चलाना है, समाज में बाहर निकलना है। इस मामले के बाद परिवार डिप्रेशन में आ गया।
नाबालिग के पिता ने आगे कहा कि, बेटी के साथ हुए भेदभाव के कारण हमारे अंदर भेदभाव का गुस्सा था। फेडरेशन के अंदर अपील की, लेकिन उन्होंने भी नहीं सुनी। हमने पुलिस को जो एप्लिकेशन दी, उसमें कुछ सच और कुछ गलत था। मैंने सही और गलत को कोर्ट में जाकर क्लियर कर दिया है।
वही, इससे पहले रेसलर (wrestler) बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक की बुधवार को दिल्ली में खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ 6 घंटे की मीटिंग हुई। जहाँ इस मीटिंग के बाद रेसलर साक्षी मलिक ने कहा कि, सरकार ने जांच पूरी करने के लिए 15 जून तक का टाइम मांगा है। तब तक उन्हें किसी तरह के प्रदर्शन न करने की अपील की है। हालांकि, पहलवानों का आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है।