लिव-इन रिलेशनशिप: कहने को हम और आप कितने भी मॉर्डन क्यों न हो गए हों लेकिन आज भी हमारे समाज में ‘Live-in relationship’ को बुरी नजर से देखा जाता हैं। जी हाँ, शादी से पहले एक लड़का और एक लड़की का अपनी स्वेच्छा से एक पति-पत्नी की तरह एक ही छत के नीचे रहना लिव-इन रिलेशनशिप कहलाता है।
श्रद्धा के 36 टुकड़े आफताब ने किए। निक्की को टुकड़े-टुकड़े करके साहिल ने फ्रीजर में डाला। अब कटने लगी हैं लिव इन में रहने वाली लड़कियाँ। फर्क क्या है, कोई आफताब काटे या फिर कोई साहिल? पढ़ लिख गई हैं, नौकरियां करती हैं, आजाद खयाल हैं, बाहर शहरों में रहती हैं, तो रहिए कोई हर्ज नहीं, अपनी मर्जी से साथी चुनिए कोई हर्ज नहीं, पर अच्छी तरह देख परख तो लीजिए, आप समझदार होंगी, बेशक होंगी, पर आपके माता पिता भी कम समझदार नहीं हैं।

फिर भी अगर लिव इन में रहना है तो जरा संभल के, विश्वास कीजिए पर अंध-विश्वास नहीं। माँ-बाप, ताऊ-चाचा, मौसी-मामी और दोस्तों से लगातार कनेक्ट रहिए। सबसे अच्छा तो यह होगा कि लिव इन में रहने से पहले लड़के के पूरे परिवार से व्यक्तिगत मिल लें, उनके संपर्क में भी लगातार रहें, निश्चित रूप से फायदा होगा।
अभी भी समाज में Live-in relationship में रहने वाले लोगों को अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता है। ऐसे रिलेशन में रहने वाली लड़कियों के चरित्र पर जहाँ सवाल उठाए जाते हैं, वहीं लड़कों को लेकर भी तरह-तरह की बातें होतीं हैं। आइये जानते है लिव इन से जुड़े कुछ कानूनी तथ्य :-
- सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में साफ किया था कि बालिग होने के बाद व्यक्ति किसी के साथ भी रहने या शादी करने के लिए आजाद है।
- सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले से लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता मिल गई थी। इस फैसले में कोर्ट ने ये भी कहा था, “कुछ लोगों की नजर में ये अनैतिक हो सकता है, लेकिन ऐसे रिलेशन में रहना अपराध के दायरे में नहीं आता”।
- हालांकि, अगर कोई शादीशुदा व्यक्ति बिना तलाक लिए किसी के साथ लिव-इन में रहे तो ये गैर-कानूनी माना जाता है। लेकिन पिछले साल पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मामले में फैसला दिया था, ‘शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन में रहना कोई जुर्म नहीं है और इससे भी फर्क नहीं पड़ता कि पुरुष ने तलाक की प्रक्रिया शुरू की है या नहीं”।
लिव-इन में रहने वालीं महिलाओं के अधिकार
- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में सामने आया था कि देश में 16 फीसदी से ज्यादा महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने अपने बॉयफ्रेंड या एक्स की यौन हिंसा का सामना किया है। यौन हिंसा तब मानी जाती है, जब महिला की इच्छा और सहमति के खिलाफ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता है। इसी सर्वे में ये भी सामने आया था कि 0.2 0.2 फीसदी महिलाओं ने शारीरिक हिंसा का सामना भी किया था।
- अदालतों ने इस बात को माना है कि अगर बगैर शादी किए कपल पति-पत्नी की तरह साथ रह रहा है तो पुरुष क्रूर हो सकता है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को घरेलू हिंसा कानून से संरक्षण दिया है। अगर लिव-इन में रहने वाली महिला के साथ किसी भी तरह की हिंसा होती है तो अदालत या पुलिस का दरवाजा खटखटा सकती है।
- इतना ही नहीं, लिव-इन में रहने वाली महिला को भी शादीशुदा औरत की तरह ही गुजारा भत्ता पाने का भी हक है। अगर महिला को उसका पार्टनर उसकी सहमति के बगैर छोड़ देता है तो वो कानून गुजारा भत्ता पाने का अधिकार रखती है।
- फिर कहेंगे कि भारतीय परिवार परंपरा दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है, अपनों के साथ रहिए, अरेंज्ड मैरिज कीजिए, अपनी गृहस्थी शान से बसाइए, यकीन मानिए सुखी रहेंगे, सलामत भी और आबाद भी, श्रद्धा की तरह टुकड़े टुकड़े होने से बच जाएंगी, निक्की की तरह फ्रीजर में जमने से भी।
लिव-इन रिलेशनशिप गाइडलाइंस
2013 के इंदिरा शर्मा बनाम बीवी शर्मा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Live-in relationship से जुड़ी गाइडलाइंस दी थी। इसमें बताया था कि लिव-इन रिलेशनशिप तभी कहलाएगा जब एक महिला और पुरुष लगातार लंबे समय तक साथ रहे हों। मतलब ये नहीं कि एक या दो दिन या कुछ महीने साथ में रहे और फिर अलग हो गए। हालांकि, इसकी कोई समयसीमा अभी तक तय नहीं है। इसके अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप तब माना जाएगा जब महिला और पुरुष एक ही घर में रह रहे हों, एक ही घर की चीजों का इस्तेमाल कर रहे हों, दोनों बालिग हों।

लिव इन पश्चिम के खुले समाज में बड़ा लोकप्रिय है, उन देशों में कोई बंधन नहीं, कोई सामाजिक ढांचा नहीं, भारत जैसा तो बिलकुल नहीं। भारतीय परिवार परंपरा दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है, अपनों के साथ रहिए, अरेंज्ड मैरिज कीजिए, अपनी गृहस्थी शान से बसाइए, यकीन मानिए सुखी रहेंगे, सलामत भी और आबाद भी, श्रद्धा की तरह टुकड़े टुकड़े होने से बच जाएंगी, निक्की की तरह फ्रीजर में जमने से भी।