जाने, कब और कहा हुआ था मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जन्म

सवाल ये उठता है कि श्रीराम के युग के बाद इतनी सभ्यताएं आई और गई कि यह तय करना असंभव प्रतीत होता है कि श्रीराम किस काल, वर्ष और खंड में जन्में?

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मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अवतारी पुरुष जरूर थे लेकिन उन्होंने सामान्य बच्चे की तरह माता के गर्भ से ही जन्म लिया था । पुराणों में इस बात को लेकर काफी मतभेद है कि श्रीराम का जन्म आखिर कब हुआ लेकिन, प्रचलित कथा के अनुसार श्रीराम का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को श्री राम का जन्म हुआ था। इस दिन देश भर में राम नवमी मनाई जाती है जो श्रीराम के जन्म की द्योतक मानी जाती है। लेकिन सवाल ये उठता है कि श्रीराम के युग के बाद इतनी सभ्यताएं आई और गई कि यह तय करना असंभव प्रतीत होता है कि श्रीराम किस काल, वर्ष और खंड में जन्में। उनके जन्म की तारीख और स्थान पर भी कई बार बहस होती है लेकिन अब तक भी बात को प्रमाणित नहीं किया जा सका है।

आइए अलग-अलग काल के पुराणों और प्रचलित मान्यताओं में लिखित श्रीराम के जन्म की तारीख को जानते हैं।

महर्षि वाल्मीकि की रामायण के अनुसार

महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण के बाल काण्ड में श्री राम के जन्म का उल्लेख इस तरह किया गया है। जन्म सर्ग 18वें श्लोक 18-8-10 में महर्षि वाल्मीक जी ने उल्लेख किया है कि श्री राम जी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अभिजीत महूर्त में हुआ। अचंभे की बात ये है कि आधुनिक युग में कंप्यूटर द्वारा गणना करने पर यह 21 फरवरी, 5115 ईस्वी पूर्व निकलता है।

तुलसीदास की रामचरित मानस के अनुसार

मानस के बाल काण्ड के 190 वें दोहे के बाद पहली चौपाई में तुलसीदास ने भी इसी तिथि और ग्रहनक्षत्रों का जिक्र किया है। तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में राम के पूरे जीवन की हर अवस्था का जिक्र करते हुए कहा है कि सोलहवें वर्ष में वो विश्वमित्र के साथ तपोवन गए और युद्ध की शिक्षा ली।

ऑन वेदा की पुष्टि के अनुसार

वाल्मीकि रामायण की पुष्टि दिल्ली में स्थित एक संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च ऑन वेदा यानी आई सर्वे ने भी की है। वेदा ने खगौलीय स्थितियों की गणना के आधार पर ये थ्योरी बनाई है कि वाल्मीकि ने तारों की गणना के आधार पर राम जन्म की स्थिति की जानकारी दी है।
वेदा द्वारा कराए गए इस शोध में मुख्य भूमिका अशोक भटनागर, कुलभूषण मिश्र और सरोज बाला ने निभाई है। सरोज बाला आईवेदा की अध्यक्ष भी हैं। इनके अनुसार 10 जनवरी 5114 को भगवान राम का जन्म हुआ था। वाल्मीकि लिखते हैं कि चैत्र मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथी को पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में कौशल्यादेवी ने दिव्य लक्षणों से युक्त सर्वलोकवन्दित श्री राम को जन्म दिया। वाल्मीकि कहते हैं कि जिस समय राम का जन्म हुआ उस समय पांच ग्रह अपनी उच्चतम स्थिति में थे।

किस समय को हुआ राम का जन्म

यूनीक एग्जीबिशन ऑन कल्चरल कॉन्टिन्यूटी फ्रॉम ऋग्वेद टू रोबॉटिक्स नाम की इस एग्जीबिशन में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार भगवान राम का जन्म 10 जनवरी, 5114 ईसापूर्व सुबह बारह बजकर पांच मिनट पर हुआ (12:05 ए.एम.) पर हुआ था।