दो साल चार महीने की लंबी लड़ाई के बाद आज केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन (Siddique Kappan) को जमानत मिल गई है। कोर्ट में श्योरिटी देने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को जेल से रिहा कर दिया गया है। सिद्दीक कप्पन और तीन अन्य लोगो को अक्टूबर साल 2020 में गिरफ्तार किया गया था, जब वे हाथरस (Hathras) जा रहे थे। जहाँ एक दलित महिला की कथित रूप से रेप के बाद मौत हो गई थी।
सिद्दीक- ये दो साल बहुत कठिन थे, लेकिन मैं कभी डरा नहीं था
जेल से छूटने के बाद पत्रकार सिद्दीक कप्पन (Siddique Kappan) ने अपनी एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि, “मैं कठोर कानूनों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखूंगा। 28 महीने की लंबी लड़ाई के बाद, जमानत मिलने के बाद भी उन्होंने मुझे जेल में रखा। मुझे नहीं पता कि मेरे जेल में रहने से किसे फायदा हो रहा था। ये दो साल बहुत कठिन थे, लेकिन मैं कभी डरा नहीं था।”
सिद्दीक कप्पन (Siddiqui Kappan) के मंगलवार शाम के बाहर आने की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा सका। क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष कोर्ट के जज बार काउंसिल के इलेक्शन में बिज़ी थे।
कप्पन पर लगाए गए थे UAPA के तहत आरोप
उन्हें अक्टूबर साल 2020 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में 20 वर्षीय दलित लड़की का कथित सामूहिक रेप और मौत की रिपोर्ट करने के लिए जाते समय पुलिस ने अपने हिरासत में लिया था। जिसने देश भर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। पुलिस का कहना था कि वह अशांति पैदा करने के लिए मौके पर जा रहे थे।
सिद्दीक कप्पन (Siddiqui Kappan) पर देशद्रोह और कठिन आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए थे। फरवरी 2022 में, प्रवर्तन निदेशालय ने उनके खिलाफ प्रतिबंधित पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया (People’s Front of India) से रूपए लेने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया था।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें तीन महीने के बाद जमानत मिल गई थी
पिछले साल सितंबर में, सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें यह देखते हुए जमानत दे दी कि, उनके खिलाफ कोई औपचारिक आरोप दायर नहीं किया गया था। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें तीन महीने के बाद जमानत मिल गई थी, लेकिन किसी कारणवश उनकी जमानत रोक दी गयी थी। हाथरस में हुई घटना पर नकारात्मक कवरेज से बचने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की कोशिशों से प्रेरित सिद्दीक कप्पन की गिरफ्तारी की विपक्ष और नागरिक समाज समूहों ने निंदा की थी और कहा था कि यह बीजेपी सरकार द्वारा मीडिया को दबाने की कोशिश का मामला है।
पुलिस ने दावा किया था कि, पत्रकार सिद्दीक कप्पन (Siddique Kappan) और उसके साथ गिरफ्तार अन्य लोग प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (Popular Front of India) और उसकी छात्र शाखा कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (Campus Front of India) के सदस्य हैं। सिद्दीक कप्पन ने आतंकी गतिविधियों या वित्तपोषण में किसी भी तरह की मिलाप से मना किया है। उन्होंने कहा कि वह पत्रकारिता के काम से हाथरस जा रहे थे।