वाराणसी के 88 घाटों पर बाढ़ का कहर

दशाश्वमेध घाट के लोगों का कहना है कि हम लोग अब रोज 10-20 कदम पीछे ही हट रहे हैं। पानी जैसे-जैसे बढ़ेगा, हम लोग पीछे यानी ऊपरी सीढ़ियों पर चढ़ते चले जाएंगे।

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Varanasi

यूपी के वाराणसी के 88 घाटों पर बाढ़ का कहर 1 लाख से ज्यादा लोगों को प्रभावित करेगा। दशाश्वमेध घाट की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती को 10 फीट पीछे खिसका दिया गया है। रोज 10-20 फीट आरती की जगह पीछे हट रही है। अब घाटों के पंडा पुरोहित, नाविक, मछुआरे, आरती आयोजक, दीया-बाती और माला-फूल के दुकानदार गंगा की उफान मारती लहरों से डरे-सहमे हैं। अब रोज ये लोग 10 कदम पीछे हट रहे हैं।

नाविकों का कहना है कि बरसात के 2 महीने हम लोग भूखमरी के कगार पर पहुंच जाते हैं। नाव चलाने पर प्रतिबंध रहता है। कुछ नहीं रहता तो फिर मछलियां मारकर पेट चलाना पड़ता है। घाटों का संपर्क एक दूसरे घाट से टूट चुका है। श्रावण मास में भारी भीड़ गंगा स्नान करती है, इसे देखते हुए एनडीआरएफ की टीम जगह-जगह लगाई गई है।

केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, जलस्तर 63.48 मीटर आ गया था। जबकि, दूसरे दिन जलस्तर 62.88 मीटर था। वहीं, 24 घंटे में 60 सेंटीमीटर पानी बढ़ा है। गंगा का जलस्तर वॉर्निंग लेवल से करीब पौने सात मीटर नीचे है। हर घंटे करीब 20 मिलीमीटर गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है।

हालांकि, अभी पानी इतना नहीं बढ़ा है कि घाट पर दबाव पड़े। मई-जून के बाद से हर दिन 150 से ज्यादा शव जलाए जा रहे हैं। इसमें किसी प्रकार की कमी नहीं आई है। हताहत वाली स्थिति तो अगले महीने ही आएगी।

दशाश्वमेध घाट के लोगों का कहना है कि हम लोग अब रोज 10-20 कदम पीछे ही हट रहे हैं। पानी जैसे-जैसे बढ़ेगा, हम लोग पीछे यानी ऊपरी सीढ़ियों पर चढ़ते चले जाएंगे। गंगा का पानी फिर 2 से 3 महीनों तक हमारा रोजगार छिन जाएगा। हम लोग बेरोजगारी का दंश झेलेंगे।

बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए सरकार ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। एनडीआरएफ की टीमें घाटों पर पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। सरकार ने लोगों को भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सामग्री भी मुहैया कराई है।