एफसीआई का ऐलान, गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध जारी रहेगा

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WHEAT PRODUCTION

New Delhi: सरकार के मुताबिक इस वर्ष भी गेहूँ के निर्यात पर रोक लगाई जाएगी और ऐसा तब तक रहेगा जब तक देश खाद सुरक्षा को लेकर सहज महसूस नहीं करता। भारतीय खाद्य निगम (FCI) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अशोक के. मीणा की माने तो अचानक आयी बरसात से गेहूँ की फसल में कोई नुकसान नहीं हुआ है।

देश भारत जोकि दुनिया का दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक देश है ने मई, 2022 में बढ़ती GDP को नियंत्रित करने के लिए गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इस वर्ष बीते सोमवार को मध्य प्रदेश में लगभग 10,727 टन गेहूं की खरीद MSP दर से गई है।

मीणा का कहना है की ‘जहां तक आम आदमी की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार का संबंध है, गेहूं के निर्यात की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसलिए, जब तक देश में अनाज को लेकर खाद्य सुरक्षा की पूर्ति नहीं होती तबतक गेहूँ के निर्यात पर रोक लगी रहेगी।

उन्होंने जानकारी दी कि इस साल अनुमान है की गेहूं उत्पादन भारतीय बाजार में सरकारी खरीद और सामान्य खपत दोनों के लिए पर्याप्त मात्रा की पूर्ति करेगा। कृषि मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक सरकार ने फसल वर्ष 2023-24 (जुलाई-जून) में रिकॉर्ड 11 करोड़ 21.8 लाख टन गेहूँ के होने का अंदाज़ा लगाया है।

इस वर्ष सरकार ने तीन करोड़ 41.5 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य भी हासिलकर लिया है। मीणा ने कहा कि FCI ने गेहूं की खरीदी शुरू कर दी है। 27 मार्च को मध्य प्रदेश में लगभग 10,727 टन गेहूं ख़रीदा गया है। उन्होंने बताया की मध्य प्रदेश में गेहूँ की पहली आवक शुरू हो गई है। लगभग 10,727 टन गेहूँ ख़रीदा गया।

FCI का वर्ष (2022 -2024 ) का लक्ष्य पंजाब से 1.32 करोड़ टन, हरियाणा से 75 लाख टन और मध्य प्रदेश से 80 लाख टन के गेहूं खरीदने का है। उन्होंने कहा कि सरकार को विश्वास है कि अनुमानित रिकॉर्ड उत्पादन के साथ-साथ इस साल खरीद का लक्ष्य भी हासिल कर लिया जाएगा। गेहूं और गेहूं केआटे की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने के लिए खुला बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) केअंतर्गत बफर स्टॉक से गेहूं की बिक्री के बारे में मीणा ने कहा कि फिलहाल इसे रोक दिया गया है क्योंकि कीमतें स्थिर हो गई हैं।