धर्म नगरी वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से लोगों की परेशानीयाँ बढ़ी

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Varanasi

Varanasi: इन दिनों काशी मोक्षदायिनी गंगा का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। धर्म नगरी वाराणसी (Varanasi) में गंगा अपने खतरे के निशान से कुछ नीचे बह रही है। गंगा का खतरे का निशान वाराणसी (Varanasi) में 71. 26 मीटर है, जिसकी वजह से गंगा अब सड़कों से होते हुए गलियों में प्रवेश कर चुकी है। सबसे बुरा  हाल महाश्मशान मणिकर्णिका का हैं, जहां शवों को जलाने के लिए लंबी कतार लगी हुई है। जिस प्लेटफार्म पर ऊंचा होने की वजह से शव जलाए जा रहे हैं। वहां एक बार में से 10 शव ही संस्कार के लिए रखे जा रहे हैं, जिसके कारण यहां आने वाले शवों को घंटो इंतजार करना पड़ रहा है। वाराणसी में अंतिम संस्कार के लिये वेटिंग चल रही है। अंतिम संस्कार के लिये 2  या 3 घंटा इंतजार करना पड़ रहा है।

कहा जाता है कि काशी में मरने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जो लोग यहां पर अपने प्राण नहीं दे पाते, वह अपने परिजनों से काशी में दाह संस्कार करने का निवेदन का करते है। जिसकी वजह से लोग अपनों के मरणोपरांत उनको मोक्ष की प्राप्ति के लिए काशी लेकर आते हैं और मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार संपन्न कराते हैं। इन दिनों काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका पर लंबी कतार लगी है। इसके पीछे बड़ी वजह है कि गंगा अपने वर्तमान जल स्तर से काफी ऊपर होकर बहना गलियों में प्रवेश कर गई है।

आपको बता दें कि महाश्मशान मणिकर्णिकाघाट का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि महाश्मशान मणिकर्णिका पर दाह संस्कार से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस वजह से यहां पर से वाराणसी (Varanasi) ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में लोग अपनों के मरणोपरांत उनके शव लेकर यहां दाह संस्कार के लिए पहुंचते हैं। यही वजह है कि यहां पर 1 दिन में 50-60 से ज्यादा शवों का दाह संस्कार संपन्न होता है। इन दिनों एक बार में 10 शव जलाए जा रहे हैं जिसकी वजह से यहां शवो की लंबी कतार लगी है। मोक्ष के लिए वेटिंग लगी हुई है।

गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही बढोत्तरी से शव के अंतिम संस्कार के लिये लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शहर में दो श्मशान घाट हैं, एक मणिकर्णिका घाट और दूसरा हरिश्चंद्र घाट। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में शव का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।