दीपावली 2023 : क्यों मनाते है दीवाली का पर्व, जाने इतिहास व् महत्त्व

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दीपावली का पर्व हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन केवल दिया जलाने और पटाखे फोड़ने का ही प्रथा नहीं है, बल्कि दीपावली मनाने के पीछे कई सारे पौराणिक कथा और प्रथा है। जिससे आज भी बहुत सारे लोग अनजान हैं। आज हम इस लेख के माध्यम से आपको बताएंगे कि दीपावली क्यों मनाई जाती है।

इतिहास

दिवाली, जिसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से मनाए जाने वाले हिंदू त्योहारों में से एक है। यह पांच दिवसीय त्योहार है जो आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर के बीच आता है, जो अंधेरे पर प्रकाश की जीत और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दिवाली का इतिहास प्राचीन हिंदू पौराणिक कथाओं में निहित है और इसके साथ कई महत्वपूर्ण किंवदंतियां जुड़ी हुई हैं। सबसे प्रमुख और व्यापक रूप से मनाई जाने वाली कहानियों में से एक भगवान राम के वनवास और राक्षस राजा रावण पर विजय के बाद अयोध्या लौटने की है।

दिवाली से संबंधित कहानी

दीवाली कई कहानियों और किंवदंतियों से जुड़ी हुई है जिनका गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है|

रामायण: महाकाव्य रामायण भगवान राम, उनकी पत्नी सीता और उनके भक्त हनुमान की कहानी कहता है। रामायण की प्रमुख घटनाओं में से एक भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या वापसी है। उनकी वापसी का जश्न मनाने और राक्षस राजा रावण पर भगवान राम की जीत का सम्मान करने के लिए, अयोध्या के लोगों ने दीये (तेल के दीपक) जलाए और पूरे शहर को सजाया। भगवान राम की घर वापसी के उपलक्ष्य में दीवाली के दौरान इस परंपरा का अभी भी पालन किया जाता है।

देवी लक्ष्मी की कहानी: धन और समृद्धि की देवी, देवी लक्ष्मी, दिवाली समारोह में एक केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। ऐसा माना जाता है कि दिवाली की रात देवी लक्ष्मी घरों में आती हैं और उन्हें धन और प्रचुरता का आशीर्वाद देती हैं। लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं और उनका आशीर्वाद लेने के लिए प्रार्थना करते हैं। कहानी समृद्धि और कल्याण के लिए देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद लेने के महत्व पर जोर देती है।

दिवाली का महत्व

धार्मिक महत्व: दिवाली का प्रमुख धार्मिक महत्व है देवी लक्ष्मी की पूजा का। लक्ष्मी धन, समृद्धि और धर्म की प्रतीक हैं। लोग इस दिन उनकी कृपा, आशीर्वाद और धन के लिए प्रार्थना करते हैं। दीपावली के दिन घर को दीपों की रौशनी से ज्योतिमय बनाने का उद्देश्य लक्ष्मी माता के आगमन का अभिप्रेत करना होता है।

सांस्कृतिक महत्व: दिवाली में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस अवसर पर लोग अपने घरों को सजाकर रंगों और दीपों से सजाते हैं। रंगोली और दीपों की रौशनी से न केवल घर की सुंदरता में वृद्धि होती है, बल्कि इससे संगठन और सामूहिक एकता की भावना भी प्रकट होती है। इस त्योहार में परिवारों और मित्रों के साथ समय बिताना, स्नेह और प्रेम को बढ़ाने का एक अच्छा मौका होता है। यह भारतीय समाज में एकता, बंधुत्व और सद्भाव की भावना को स्थापित करता है।

सामाजिक महत्व: दिवाली एक सामाजिक त्योहार है जो लोगों को एक-दूसरे के साथ जोड़ता है और उन्हें खुशियों के साथ एकत्र करता है। लोग मिठाई और उपहार बांटते हैं, एक दूसरे के साथ मिलकर खाने-पीने का आनंद लेते हैं, और सामूहिक रूप से प्रदर्शन और मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसे एक खुशहाल और उत्साहभरा माहौल के रूप में मनाने का एक अवसर माना जाता है, जिससे सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं और समुदाय में खुशहाली की भावना प्रबल होती है।