चीन में लोगो के द्वारा जीरो-कोविड पॉलिसी का विरोध करने के बाद सरकार ने लॉकडाउन हटा दिया, लेकिन अब यहां स्थिति खराब होती नजर आ रही है। अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गयी है। इतना ही नहीं मेडिकल स्टाफ भी संक्रमित हो रहा है। कुछ डॉक्टर्स कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
इसी बीच 2 साल तक कड़े कोरोना नियम लागू करने वाली चीन सरकार ने यू-टर्न ले लिया है। अब अधिकारियों का कहना है कि कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट खतरनाक नहीं है। यहां तक कि सरकार लोगों से सेल्फ केयर की बात कह रही है। यानी सरकार का कहना है कि कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है। लोग खुद का ध्यान रखें तो संक्रमण से बचा जा सकता है।
सरकार के लॉकडाउन हटाने के फैसले का खामियाजा डॉक्टर्स भुगत रहे हैं। हॉस्पिटल्स में कोरोना संक्रमित मरीजों की लाइन लगी हुई है। इनका इलाज करने वाले कई डॉक्टर्स संक्रमित हो गए हैं। एक मेडिकल स्टाफ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर बताया कि संक्रमित होने के बावजूद उनसे काम करवाया जा रहा है।
चीन में लोगों ने जीरो कोविड पॉलिसी के खिलाफ प्रदर्शन किया। नारेबाजी करते हुए राष्ट्रपति शी जिनपिंग से इस्तीफा भी मांगा। ये प्रदर्शन 25 नवंबर को शिंजियांग के एक अपार्टमेंट में लगी आग के बाद किया गया। दरअसल, जीरो कोविड पॉलिसी के तहत लगाए गए लॉकडाउन के चलते दमकलकर्मी वक्त रहते आग बुझाने यहां नहीं पहुंच पाए। इससे 10 लोगों की मौत हो गई थी। लोग सड़कों पर बैनर लेकर खड़े थे। बैनर पर लिखा था- नीड ह्यूमन राइट, नीड फ्रीडम यानी हमें मानव अधिकार और आजादी चाहिए।