मोदी सरकार का अंतरिम बजट कल आया जिसके बाद से कर्नाटक के कांग्रेस नेता डीके सुरेश कुमार बिल्कुल भी खुश नहीं हैं और इसी वजह से उन्होंने बीजेपी पर विभाजनकारी मानसिकता रखने का आरोप लगाते हुए दक्षिण को अलग देश बनाने की मांग करी है। कांग्रेस नेता ने केंद्र पर बजट में दक्षिण भारत को विकास के लिए पैसा नहीं देने और इस पैसे का उपयोग उत्तर भारत में करने का आरोप लगाया।
जाने संसाद डीके सुरेश कुमार का बयान

कांग्रेस सांसद डीके सुरेश कुमार ने कहा है कि दक्षिण भारत में “हर स्तर पर अन्याय” हो रहा है, हम अपना पैसा लेना चाहते हैं, चाहे वह जीएसटी, सीमा शुल्क या प्रत्यक्ष कर हो, हम अपना सही हिस्सा चाहते हैं।
दक्षिण भारत को अलग देश बनाने की मांग
डीके सुरेश कुमार ने कहा कि अगर मामले का समाधान नहीं किया गया तो दक्षिण को एक “अलग देश” बनाना होगा।आपको बता दें कि कांग्रेस पिछले साल ही सत्ता में आई है। वह भी ममता बनर्जी की तरह ही केंद्र पर राज्य को पैसा नहीं देने का आरोप लगा रही है। उनका कहना है कि दक्षिण भारत में “हर स्तर पर अन्याय” हो रहा है, उन्होंने कहा कि, “हम अपना पैसा लेना चाहते हैं, चाहे वह जीएसटी, सीमा शुल्क या प्रत्यक्ष कर हो, हम अपना सही हिस्सा चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के लिए हमारे हिस्से का पैसा उत्तर भारत में बांटा जा रहा है।
“कांग्रेस की मानसिकता देश को बांटने की”
कांग्रेस सांसद ने मीडिया से कहा, “अगर हम आने वाले दिनों में इसकी निंदा नहीं करते हैं, तो हमें हिंदी भाषी क्षेत्र द्वारा हम पर थोपी गई स्थिति को देखते हुए एक अलग देश की मांग करनी होगी। बीजेपी के चलवादी नारायणस्वामी ने कहा कि कांग्रेस “भारत जोड़ो” के बजाय “भारत तोड़ो” पर विचार कर रही है, कांग्रेस की मानसिकता देश को बांटने की है। उन्होंने 1947 में भी ऐसा किया था, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी उत्तर भारत और दक्षिण भारत को विभाजित करने की बात की जा रही है। उन्होंने संविधान को बनाए रखने और देश को एकजुट रखने की शपथ ली है, अब, यह क्या है?”
कर्नाटक कांग्रेस का श्वेत पत्र
इस महीने की शुरुआत में, राज्य कांग्रेस ने एक श्वेत पत्र जारी कर आरोप लगाया भारत के विकास में कर्नाटक का अहम योगदान है, लेकिन केंद्र से इसे बहुत कम रिटर्न मिल रहा है। राज्य कांग्रेस के प्रवक्ता एम लक्ष्मण ने कहा कि साल 2023-24 में कॉर्पोरेट और अन्य करों के तहत कर्नाटक का योगदान के लिए 2.25 लाख करोड़ रुपये था, लेकिन टैक्स डिवोल्यूशन के तहत वह केवल 37,252 करोड़ रुपये की उम्मीद थी। कर्नाटक का जीएसटी योगदान करीब 1.4 लाख करोड़ था, जबकि 13,005 करोड़ की उम्मीद थी।